Wednesday, 6 April 2016

आरक्षण की मांग

आरक्षण एक ऐसा शब्द है जो न जाने कितने सालों से हम देशवासियों के ज़हन मे बसा हुआ है। अगर आरक्षण की समीक्षा की जाए तो बहस की जड़ शुरु होती है वी.पी. सिंह से जिंहोने इसकी शुरूआत की। मंडल कमीशन की सिफारिशों को लेकर राजनीति,देश और छात्र दो गुटों मे बट गए थे। वह आरक्षण की पहली सीढ़ी थी जो चढ़ते चढ़ते आजतक खत्म नही हुई।
देश की आबादी मे एससी,एसटी और ओबीसी केवल 61.2 फिसदी ही हिस्सा रखते है। जिसमे सरकारी नौकरी और अन्य मे 49.5 फिसदी का प्रावधान है। आरक्षण का सीधा जु़ड़ाव सरकारी नौकरी से है। एक तरफ जहां सरकारी नौकरियां दिन ब दिन घटती जा रही हैै। वही आरक्षण की मांग दूशरे समुदायों मे बढ़ती जा रही है।

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